भूगर्भशास्त्र/भूविज्ञान/भौमिकी

  • अर्थ -भूगर्भ शास्त्र अंग्रेजी का पर्याय geology (geo-पृथ्वी) (logy-अध्ययन)अतः शाब्दिक अर्थ है पृथ्वी का अध्ययन करना ।
  • Geology शब्द का सर्व प्रथम प्रयोग 1473 ई. में रिचर्ड डी बरी द्वारा किया गया।
  • परिभाषा:- ग्रोटजिंगर एवं जार्डन के अनुसार- भूगर्भ शास्त्र पृथ्वी विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पृथ्वी ग्रह के सभी पहलुओं जैसे- इतिहास, उत्पत्ति, संयोजन ,आंतरिक संरचना और इसके लक्षणों का अध्ययन किया जाता है।


भूगर्भ शास्त्र का महत्व:-

  • प्राकृतिक संसाधनों के संदर्भ में
  •  जल संसाधन के संदर्भ में
  •  ऊर्जा संसाधनों की दृष्टि में 
  • अभियांत्रिकी परियोजनाओ के निर्माण एवं विकास में ।
  •  रोजगार के सृजन में 
  • पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और क्रमिक विकास में 
  • प्राकृतिक आपदा के प्रबंधन में 
  • सतत कृषि विकास मे
  • प्राकृतिक संसाधनों की प्राप्ति के संदर्भ में:-
    • भूपर्पटी पर उपयोगी पदार्थों के अन्वेषण, दोहन और संरक्षण हेतु जैसे -निर्माण सामग्री प्राप्ति, धातु ,खनन, रत्न प्राप्ति, औषधियों की प्राप्ति आदि।
  • जल संसाधन के संदर्भ में:-
    • जल का अन्वेषण संरक्षण और उपयोगिता
    • नवीन बांध ,जलाशय आदि के निर्माण से पूर्व अध्ययन
    •  जल दोहन हेतु परिस्थितियों का ज्ञान
  • ऊर्जा संसाधन के संदर्भ में:-
    • ऊर्जा स्रोतों को खोजने और दोहन करने में
    • जैसे कोयला क्षेत्र ,पेट्रोलियम क्षेत्र, रेडियो सक्रिय पदार्थ जैसे- यूरेनियम, थोरियम आदि की खोज, भूतापीय ऊर्जा आदि का अध्ययन करना।
  • प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में:- आपदाओं को नियंत्रण करने एवं उससे होने वाले नुकसान को कम करने में 
    • जैसे भूकंप पूर्वानुमान 
    • बाढ़ प्रवण क्षेत्र का निर्धारण 
    • निमज्जन क्षेत्रों के निर्धारण 
    • भूस्खलन क्षेत्रों की पहचान
  • अभियांत्रिकी परियोजनाओं के निर्माण एवं विकास में
    • भूगर्भ शास्त्र अभियांत्रिकी परियोजना के शुरू होने से पहले, दौरान और बाद में रखरखाव हेतु 
    • उदाहरण बांध निर्माण,, सुरंग निर्माण ,रेलवे,सड़क, पुल आदि के निर्माण में।
  • पृथ्वी की उत्पत्ति और क्रमिक विकास में
    • भूगर्भ शास्त्र -जीवाश्म विज्ञान –प्रमाणों से पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और क्रमिक विकास का पता करना।
  • सतत कृषि विकास में
    • कृषकों को जमीन, आधार शैल तथा मृदा संरचना और संयोजन की जानकारी।
    •  जल प्रबंधन कुशल सिंचाई प्रणाली, वर्षा जल संरक्षण ।
    • कृषि जलवायु क्षेत्र निर्धारण।
  • रोजगार के अवसरों के सृजन में
    • खनन एवं संबंधित उद्योगों 
    • सिविल अभियांत्रिकी विभागों
    • भू तकनीकी परामर्श कंपनियों 
    • राष्ट्रीय जल विद्युत परियोजनाओं में 
    • पेट्रोलियम उद्योग एवं पर्यावरण परामर्श दाता के रूप में।

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