ताम्र पाषाण काल 

  • पत्थर एवं तांबे का प्रयोग
  • ताम्र पाषाण कालीन सभ्यता ग्रामीण सभ्यता थी।
  • समय काल 2000 ई. पू. से 1000 ईसा पूर्व तक 
  • औजार बनाने के लिए पत्थरों के साथ तांबे का प्रयोग किया गया 
  • मानव द्वारा प्रयोग की गई पहली धातु- तांबा (5000 ई. पू.)

प्रमुख स्थल-

  • नावदा टोली
    • प्रागैतिहासिक स्थल 
    • नर्मदा घाटी महेश्वर (खरगोन) में स्थित 
    • मालवा संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा।
    • खोज :-एचडी संकलिया मृदभांड के साक्ष्य
  • कायथा– 
    • उज्जैन
    • ताम्र पाषाण कालीन मालवा संस्कृति का स्थल 
    • उज्जैन के निकट कालीसिंध नदी के किनारे 
    • 1964 मे वी एस वाकणकर के द्वारा खोज।
    • साक्ष्य भूरे रंग के मृदभांड
  • खेड़ी नामा
    • होशंगाबाद, 
    • ताम्र युगीन सभ्यता के साक्ष्य
  • बेसनगर
    • यह विदिशा का प्राचीन नाम है। यहां से भी ताम्रपाषाणिक साक्ष्य मिले  है।
  • आवरा
    • मंदसौर
    • ताम्र पाषाण कालीन मालवा संस्कृति का स्थल 
    • मंदसौर के निकट चंबल नदी के किनारे 
    • रोमन व्यापार के साक्ष्य मिले 
    • खोज- H. V. द्विवेदी द्वारा
  • एरण
    • ताम्र पाषाण कालीन मालवा संस्कृति का स्थल 
    • सागर में स्थित 
    • गुप्तकालीन अभिलेख (सती प्रथा के साथ) 
    • खोज कृष्ण दत्त बाजपेई 
स्थलस्थानखोजकर्ता
नावदा टोलीखरगोनएचडी संकलिया
कायथाउज्जैनवी एस वाकणकर
आवरामंदसौरH. V. द्विवेदी
एरणसागरकृष्ण दत्त बाजपेई
खेड़ी नामाहोशंगाबाद 
बेसनगरविदिशा 
डांगवालाउज्जैन 
नागदाउज्जैन 
  • नागदा
    • उज्जैन, चंबल नदी किनारे
  • डांगवाला

उज्जैन जिले में स्थित है। लाल काले मृदभांड, तांबे एवं पत्थर की मूर्तियां एवं औजार प्राप्त हुए

ताम्र पाषाण काल संस्कृति

आहड़ या बनास संस्कृति-

  • इसका विकास राजस्थान में बनास नदी के किनारे हुआ

मालवा संस्कृति

  • इसका विकास नर्मदा घाटी क्षेत्र एवं मालवा में हुआ
  • मालवा मृदभांड, ताम्रपाषाणिक मृदभांडों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं

जोर्वे संस्कृति

  • इसका विकास महाराष्ट्र में हुआ

झुकर संस्कृति

  • इसका विकास पाकिस्तान में हुआ।

प्रभास संस्कृति

  • गुजरात के तटीय क्षेत्रों में

कांस्य युगीन काल या हड़प्पा सभ्यता

इसके साक्ष्य मध्यप्रदेश में नहीं मिले हैं।

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