पौराणिक कालखण्ड

वैदिक और उत्तर वैदिक काल के पश्चात के इतिहास की जानकारी के लिए रामायण, महाभारत तथा पुराणों में वर्णित अनुश्रुतियाँ ही वर्तमान साधन है।

रामायण काल/त्रेता युग

  • वाल्मीकि आश्रम तमसा/टोंस नदी के तट पर स्थित था जहां पर लव एवं कुश का जन्म हुआ एवं माता सीता ने अपना निर्वासित जीवन व्यतीत किया था।
  • शत्रुघ्न के पुत्र शत्रुघाती ने विदिशा (राजधानी – कुशावती) पर शासन किया।
  • कुश ने दक्षिणी कौशल पर शासन किया था।
  • विंध्य क्षेत्र पर शबरी आश्रम अवस्थित था जहां कोल जनजाति की महिला शबरी निवास करती थी।
  • चित्रकूट में ऋषि अत्रि एवं सती अनसूया का आश्रम स्थित है, जहां त्रिदेव ने बाल रूप में अवतार लिया एवं भगवान राम ने अपना कुछ समय इस आश्रम में व्यतीत किया।
  • भातखेड़ी शाजापुर में रावण की पूजा की जाती है एवं मंदसौर को रावण की ससुराल माना जाता है।

महाभारत काल/द्वापर युग

  • प्रमुख नगर महाभारत कालीन कुंतलपुर एवं विराटपुरी
  • महाभारत युद्ध में पांडवों की ओर से वत्स, चेदी, कारूष, दशार्ण जनपदों ने भाग लिया था
  • जबकि कौरवों की ओर से अवंती, निषाद, माहिष्मती जनपद ने भाग लिया था।
  • पांडवों के वनवास संबंधी स्थल –
    • पांडव गुफा- पचमढ़ी
    • भीमकुंड- छतरपुर
    • भीमबेटका- रायसेन
    • पांडव जलप्रपात- पन्ना
  • विराटनगर (सुहागपुर) में भीम द्वारा कीचक वध किया गया था। इस विराटनगर में पांडवों ने अपना 1 वर्ष का अज्ञातवास व्यतीत किया था।

अनुश्रुतियों के अनुसार

  • अंतिम मनु वैवस्वत के दस पुत्रों में करुष नाम के पुत्र से कारुष वंश चला तथा कारुष देश की स्थापना हुई।
  • कारुष देश मध्यप्रदेश में वर्तमान रीवा के आसपास बघेलखण्ड के नाम से जाना जाता है।
  • वैवस्वत मनु की पुत्री का नाम इला था, जिसका विवाह सोम से हुआ था।
  • इसी से ऐल अर्थात चन्द्रवंश की स्थापना हुई जिसका आदि पुरुष पुरुरवा था।
  • इसी के अधीन ऐल साम्राज्य का विस्तार बुंदेलखण्ड तक हो गया था।
  • पुरुरवा के पुत्र आयु और अमावसु हुए।
  • आयु की तीसरी पीढ़ी में ययाति हुआ।
  • ययाति ने भार्गव ऋषि की कन्या देवयानी से विवाह किया।
  • देवयानी से उसके दो पुत्र ‘यदु’ और ‘तुर्वसु’ हुए और शर्मिष्ठा से तीन पुत्र ‘अनु’, ‘द्रा’ तथा पुरु हुए।
  • यदु से ‘यादव वंश’ की स्थापना हुई तथा पुरु से ‘पौरव वंश’ की।
  • ययाति ने अपने विशाल साम्राज्य का विभाजन अपने पुत्रों में कर दिया।
  • इस विभाजन में यदु को चर्मणवती (चम्बल), वैत्रवती (बेतवा) तथा शुक्तिमती (केन) की धाराओं से सिंचित प्रदेश प्राप्त हुआ।
  • यदु के दो पुत्र थे- क्रोष्टर और सहस्त्रजित।
  • क्रोष्टर की संतान ‘यादव’ कहलाई और सहस्रजित की ‘हैहय’।
  • इक्ष्वाकु के पुत्र दण्डक के नाम पर दण्डकारण्य नाम पड़ा।
  • ऐलवंश की राजकुमारी बिन्दुमती से तीन पुत्र पुरुकुत्स, अम्बरीष और मुचुकुन्द तथा कावेरी नामक कन्या हुई।
  • पुरुकुत्स ने मध्यप्रदेश में मध्यभारत क्षेत्र में बसे नाग राजाओं को मौनेय गंधर्वों के विरुद्ध सहायता देकर विजयी बनाया तथा नाग राजा की कन्या नर्मदा से विवाह किया।
  • नर्मदा के भाई मुचुकुन्द ने पारियात्र और यक्ष पर्वत के प्रदेश को जीतकर नर्मदा के किनारे दुर्ग का निर्माण किया।
  • हैह्रय राजा महिष्मंत ने मुचुकुन्द को पराजित कर उससे यह दुर्ग छीन लिया।
  • इस नगर तथा गढ़ का नाम महिष्मंत ने महिष्मती (महेश्वर) रखा।
  • महिष्मंत के वंश में ‘कृत्तवीर्य’ हुए जिसके राज्यकाल में विशाल ‘हैहय साम्राज्य’ की स्थापना हुई।
  • कृत्तवीर्य के वंश में ‘कीर्तवीर्य सहस्त्रबाहु अर्जुन’ कहा जाता है, सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में फैले विशाल हैहय साम्राज्य का उत्तराधिकारी हुआ।
  • महिष्मंत वंशीय ‘कीर्तवीर्य सहस्त्रबाहु अर्जुन’  महान चक्रवर्ती सम्राट था और उसके हजार भुजाएँ कही जाती हैं जो संभवतः उसकी अपार सैन्यशक्ति का द्योतक है।
  • कीर्तवीर्य ने जमदग्नि, टारकोट, बंशीनाग अयोध्या के पौरवराज, त्रिशंकु और लंका के राजा रावण को पराजित किया। किंतु जमदग्नि के पुत्र परशुराम के हाथों पराजित हुआ।
  • परशुराम के पश्चात हैहय पुनः खड़े हो गये। कार्तवीर्य सहस्त्रार्जुन के पुत्र जयध्वज का राज्य अवन्ति (मालवा) पर था।
  • जयध्वज का पुत्र तालजंघ हुआ जिसके पाँच पुत्र थे- ‘वीतिहोत्र’, ‘शार्यात’, ‘भोज’, ‘अवन्ति’ और ‘कुंडिकेर’।
  • अवन्ति ने मालवा क्षेत्र में राज्य किया और उसी के नाम से यह क्षेत्र अवन्ति नाम से जाना जाने लगा।

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