महाजनपद काल एवं मध्यप्रदेश

  • 6th BC का काल
  • महाजनपद काल का उल्लेख अंगूत्तर निकाय (बौद्ध धर्म ग्रंथ) एवं भगवती सूत्र (जैन धर्म ग्रंथ)
  • कुल 16 महाजनपदों का उल्लेख किया गया है जिनमें से दो मध्यप्रदेश में अवस्थित थी- अवंती एवं चेदी

  अवंती महाजनपद

  • ऋग्वेद में अवंती महाजनपद का उल्लेख मिलता है
  • वराह पुराण के अनुसार उज्जैनी भारत के 7 मोक्षदायिनी नगरों में से एक था
  • उत्तरी अवंति – राजधानी उज्जैनी
  • दक्षिणी अवंती – राजधानी माहिष्मती 
  • प्रमुख शहर- कुरटधर, सुदर्शनपुर
  • अवंती महाजनपद के प्रमुख जनपद– 
    • वत्स जनपद- वर्तमान में ग्वालियर 
    • अनूप – निमाड़
    • अनलपुर -शिवपुरी 

 चेदी या शूक्तिमती महाजनपद

  • बेतवा एवं नर्मदा के मध्य वर्तमान बुंदेलखंड
  • चेदी महाजनपद के प्रमुख जनपद-
    • दशार्ण- वर्तमान विदिशा 
    • तूंडीकर –दमोह
  • प्रद्योत वंश

•- इस वंश की जानकारी हमें पुराणों से प्राप्त होती है।

•- बुद्ध के समकालीन, अमात्य पुलिक (सुनिक) ने समस्त क्षत्रियों के सम्मुख अपने स्वामी की हत्या करके अपने पुत्र प्रद्योत को अवन्ति के सिंहासन पर बैठाया।

•- “हर्षचरित” ग्रंथ के अनुसार इस अमात्य का नाम पुणक (पुणिक) था। चंड प्रद्योत

चण्ड प्रद्योत

•- अपने समकालीन समस्त राजाओं में सबसे शक्तिशाली था, इसलिए उसे “चंड’ कहा जाता था।

•- बौद्ध ग्रंथ “विनयपिटक’ के अनुसार चण्ड प्रद्योत का बिम्बिसार के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध थे। जब चण्ड प्रद्योत एक भयाभय रोग  से ग्रसित था, तब बिम्बिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को उज्जैयिनी भेजकर उसका उपचार कराया था। यह हाथीपालन का विशेषज्ञ था।

•- इस वंश का अंतिम शासक नन्दिवर्धन था । 

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