मौर्योत्तर कालीन मध्य प्रदेश/ शुंगकालीन मध्य प्रदेश

  • संस्थापक- पुष्यमित्र 
  • पुष्यमित्र शुंग ने अपनी दो राजधानी बनाई-
    • पाटलिपुत्र एवं
    • अवंती राज्य में स्थित विदिशा नगर 
  • अपने शासनकाल में पुष्यमित्र ने युवराज अग्निमित्र को विदिशा का शासक बनाकर भेज दिया था 
  • कालिदास रचित मालविकाग्निमित्र में यही अग्निमित्र नाटक का नायक है
  • मालविकाग्निमित्र के अनुसार अग्निमित्र ने विदर्भ के शासक यज्ञसेन के साथ युद्ध कर विदर्भ के एक बड़े माग पर अधिकार कर लिया तथा अपने राज्य की सीमा वर्धा नदी तक विस्तृत कर ली थी।
खंबा बाबा

भागवत या भागवट्ट (शुंग वंश का आठवां शासक) पुष्यमित्र के बाद शासक बना, इसी के दौरान हेलिओडोरस के द्वारा गरुण स्तंभ/ खंबा बाबा का निर्माण विदिशा में कराया एवं स्वयं को भगवत धर्म का अनुयायी बताया

  • हेलिओडोरस यूनानी शासक एंटीयालकिड्यस का  का राजदूत था।
  • साँची तथा भरहुत के स्तूपों में शुंगकाल में सुधार किये गए।
  • भरहुत का स्तूप मूलतः अशोक द्वारा निर्मित करवाया गया था । शुंगकाल में इसकी चहार दीवारी तथा तोरण द्वार का निर्माण किया गया.

हिंद यवन (indo-greek)

  • मध्यप्रदेश के बालाघाट से मिनांडर के सिक्के प्राप्त हुए 
  • रोम के सिक्के आवरा मंदसौर से प्राप्त हुए।

सातवाहन वंश

  • संस्थापक- सिमुक 
  • सिमुक ने विदिशा पर शासन किया 
  • साँची के बाड़े की वेदिका पर उत्कीर्ण एक लेख से शतकर्णी के पूर्वी मालवा क्षेत्र पर अधिकार का पता चलता है।
  • गौतमीपुत्र शातकर्णी सातवाहन वंश का सबसे बड़ा और पराक्रमी राजा था । 
  • उसके पुत्र वासिष्ठीपुत्र पुलुमावी के नासिक अभिलेख में उसकी सफलताओं का वर्णन मिलता है, उसके राज्य के अन्तर्गत अनूप (माहिष्मती-आधुनिक महेश्वर के आस-पास के निमाड़), आकर (पूर्वी मालवा) तथा अवन्ति (पश्चिमी मालवा) भी शामिल थे।
  • यज्ञ श्री सातकर्णि के सिक्के बेसनगर, तेवर और देवास से मिले हैं।
  •  सातवाहन शासक गौतमीपुत्र सातकर्णि का सांची के स्तूप के दक्षिणी तोरण में उल्लेख है।

शक-क्षत्रप काल

  • प्रथम शताब्दी ई.पू. में उत्तर-पश्चिम भारत में यूनानी राज्य का अंत हो गया। उसके स्थान पर शक नामक एक अन्य विदेशी जाति ने अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया।
  • शकों ने राजधानी के रूप में मथुरा,तक्षशिला,नासिक, एवं उज्जैयिनी को बनाया, 
  • शकों का सबसे प्रतापी राजा रुद्रदामन था, जिसने अपनी राजधानी उज्जैयिनी रखी।

शकों के दो वंश थे क्षहरात और कार्दमक

  • क्षहरात वंश-
    • क्षहरात वंश के शासक भूमक और नहपान थे।
    • भूमक के बारे में मालवा से प्राप्त सिक्कों से जानकारी मिलती है।
  • कार्दामक वंश-
    • इसकी स्थापना यशोमिती ने की। उसके पुत्र चष्टन ने उज्जैन में शासन किया।
    • इस वंश का प्रसिद्ध राजा रुद्रदमन, संस्कृत का महान ज्ञाता था।
    • रुद्रदामन के गिरनार अभिलेख से प्राप्त जानकारी अनुसार इसने सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण करवाया था।
    • रुद्रदामन ने म.प्र. में तिथियुक्त चाँदी के सिक्के चलाये।
    • शकों के अंतिम शासक रूद्रसिंह तृतीय को मारकर विक्रमादित्य ने उज्जैन का विलय गुप्त साम्राज्य में कर दिया।
    • शकों पर विजय के उपलक्ष्य में विक्रमादित्य ने विक्रम संवत या मालवा संवत(57B.C.) की शुरुआत करी थी।

कुषाण वंश

  • संस्थापक- कुजुल कडफिसेस
  • विम कडफिसेस के सिक्के विदिशा से प्राप्त हुए
  • कुषाण शासकों के सिक्के शहडोल से प्राप्त हुए।

नागवंश

  • संस्थापक- वृषनाग 
  • कुषाण वंश के पतन के बाद नाग वंश के शासकों का उदय हुआ 
  • भीमनाथ शासक के सिक्के विदिशा से प्राप्त हुए 
  • राजधानी:- विदिशा, ग्वालियर
  • इस मंच की स्थापना ग्वालियर में हुई परंतु कालांतर में यह वंश मथुरा,पद्मावती, कात्तीपुर तक विस्तृत हुआ।

आभीर वंश 

  • संस्थापक- ईश्वर सिंह 
  • आभीरो ने खानदेश में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की।

वाकाटक वंश

  • संस्थापक- विंध्य शक्ति
  • मूलस्थान बुंदेलखंड
  • विदिशा पर शासन किया।

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