गुप्तकालीन मध्य प्रदेश

गुप्तकालीन नाम
साँचीकाकनादबोट
सागरस्वभोग नगर
  • संस्थापक– श्री गुप्त या घटोत्कच (सुपिया अभिलेख रीवा के अनुसार)
  •  समुद्रगुप्त की नीतियां-
    • प्रसभोद्धरण की नीति- आर्यावर्त
    • ग्रहण मोक्षानुग्रह की नीति- दक्षिण विजय
    • परिचारिकीकृत की नीति- आटविक
    • सर्वदानाज्ञाकरण की नीति- सीमावर्ती
    • कन्योपायन की नीति- विदेशी
  • चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के द्वारा मालवा विजय-
    • राजधानी- उज्जैनी
    • पश्चिम में अरब सागर तक विस्तृत 
    • कालिदास के मेघदूत, शूद्रक के मृछकटिट्कम से गुप्तकालीन जानकारी प्राप्त  होती है
    • उज्जैन शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।

गुप्तकालीन स्थल 

  • उदयगिरि की गुफाएं-
    • विदिशा
    • हिन्दू एवं जैन धर्म से सम्बंधित उदयगिरि को पहले नीचैगिरि के नामा से जाना जाता था
  • तिगवा मंदिर- जबलपुर
वराह अवतार, उदयगिरि 
  • वराह अवतार, उदयगिरि  मंदिर के प्रवेश द्वार पर मकरवाहिनी गंगा एवं कूर्मवाहिनी यमुना की आकृतियां उत्कीर्ण।
  • नागर शैली में
  • नचना कुठार- पन्ना
    •  पार्वती मंदिर
नचना कुठार
तिगवा मंदिर
  • बाघ की गुफाएं- धार (बाघिनि/बाघेश्वरी नदी के तट पर)
  • भूमरा शिव मंदिर, सतना
  • खो मंदिर- नागौद, सतना
  • सूर्य मंदिर- मंदसौर

मध्यप्रदेश में प्रमुख गुप्तकालीन अभिलेख-

मंदसौर अभिलेख 

  • यह गुप्त सम्राट कुमारगुप्त के समय का अभिलेख है 
  • संस्कृत भाषा में 
  • रचनाकार- वत्सभट्टी 
  • विक्रम तिथि इंगित है 
  • सूर्य मंदिर एवं पशुपतिनाथ मंदिर का उल्लेख 
  • बुनकर श्रेणी रेशम का वर्णन

तूमेन का अभिलेख

  • अशोकनगर जिले में स्थित
  • कुमार गुप्त द्वारा बनाया गया
  • राजा को शरद कालीन सूर्य की भांति बताया गया है।

एरण अभिलेख

  • 510 ईसा के समय 
  • भानु गुप्त के समय निर्मित
  • इसमें सती प्रथा एवं हूण आक्रमण के साथ 
  • भानु गुप्त का अधिकारी गोपराज की एरण युद्ध में मृत्यु

सूपिया अभिलेख

  • रीवा जिले में स्थित
  • इसमें गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक घटोत्कच को माना गया है।

उदयगिरि अभिलेख

  • स्थिति- विदिशा
  • चंद्रगुप्त द्वितीय के संधि विग्रहिक वीरसेन के अभिलेख मध्य प्रदेश में गुप्त सत्ता के स्पष्ट साक्ष्य है।
  • इस अभिलेख में शंकर नामक व्यक्ति द्वारा इस स्थान पर पार्श्वनाथ की मूर्ति स्थापित किए जाने का उल्लेख है।

सांची अभिलेख

  • हरि स्वामी दास द्वारा लिखा गया।
  • आर्य संग को भूमि दान का वर्णन
  • यह अभिलेख 431 ई से 450 ई के मध्य माना जाता है।

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