गुप्त एवं गुप्तोत्तर कालीन मध्य प्रदेश के स्थानीय राजवंश

औलिकर वंश

  • इस वंश का प्रथम शासक नववर्मन था 
  • मंदसौर अभिलेख से इसका उल्लेख 
  • राजधानी- मंदसौर 
  • अन्य शासक-
    • यशोधर्मन एवं बंधु बर्मन 
  • मंदसौर से प्राप्त अभिलेखों में यशोधर्मन को उत्तरी भारत के महान शासक के रूप में बताया गया है। 
  • यशोधर्मन ने हूणो को पराजित किया (मंदसौर प्रशस्ति)। 

 हूण एवं मध्यप्रदेश

  • तिगिन को हूणो का प्रथम राजा माना जाता है।
  • तोरमाण के नेतृत्व में हूणो का आक्रमण हुआ।
  • मिहिरकुल के शासनकाल में ग्वालियर दुर्ग से प्राप्त अभिलेख में गोप पर्वत पर सूर्य मंदिर के निर्माण का उल्लेख है। 
  • मिहिरकुल के शासनकाल  के 15 वे वर्ष का ग्वालियर अभिलेख मध्यप्रदेश में हूणों की विद्यमानता का साक्ष्य है।
  • मंदसौर के औलीकर वंश शासक यशोवर्धन ने मिहिरकुल  को पराजित करके मालवा से खदेड़ दिया था।

परिव्राजक राजवंश

  • 5वी शताब्दी, पन्ना जिले की क्षेत्र में
  • संस्थापक एवं महानतम शासक हस्तिन
  • ‘खो अभिलेख’ से परिव्राजक वंश की वंशावली की जानकारी मिलती है
  • परिव्राजक राजवंश के अभिलेख जबलपुर, मझगवां, भूमरा से प्राप्त हुए हैं।

उच्चकल्प वंश

  • संस्थापक- ओघदेव
  • मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र मे गुप्त वंश के समकालीन।
  • राजधानी – उच्चकल्प (सतना)
  • व्याघ्र राज, जयनाथ, जमर वाहिनी

नलवंश 

  • संस्थापक- भवदत्त वर्मा
  • वाकाटक वंश के शासकों के समकालीन
  • प्रमुख केन्द्र – बस्तर
  • बालाघाट जिले से एक ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है जिससे नल वंश के शासकों की वंशावली प्राप्त होती है।
  • नलवंश से प्राप्त चार लेखों में महाराष्ट्र के रिद्धपुर , उडीसा के पोडागढ व केसरी, छत्तीसगढ़ के रामपुर

शरभपुरीय वंश

  • 5 वी शताब्दी के अंत में उदय
  • संस्थापक- शरभ
  • राजधानी- सिरपुर, रामपुर जिला छत्तीसगढ़
  • इस वंश के संस्थापक अपने आपको परम भागवत कहते थे।

शैल वंश

  • आठवीं शताब्दी में महाकौशल के पश्चिमी भाग में उदय हुआ।
  • प्रथम शासक श्रीवर्धन था
  • इस वंश के ताम्रपत्र बालाघाट से प्राप्त हुए हैं।

मौखरी वंश

  • मौखरी वंश का उदय गुप्त वंश के पतन के पश्चात हुआ
  • इसका प्रारंभिक शासन क्षेत्र पश्चिम उत्तर प्रदेश, बांदा, बुंदेलखंड क्षेत्र में है।
  • संस्थापक – हरिवर्मा
  • अन्य शासक- आदित्य वर्मन , ईश्वर वर्मन, ईशान वर्मन, अंवती वर्मन
  • बाद के वर्षों में इसके शासन क्षेत्र का क्षेत्र पूर्वी निमाड एवं असीरगढ़ भी था
  • मौखरियो की सबसे शक्तिशाली शाखा कन्नौज की शाखा थी जिसे कान्यकुब्ज शाखा के नाम से जाना जाता था।

पाण्डुवंश

  • संस्थापक- जयबल
  • मैकल, अमरकंटक
  • गुप्तों के सामंत

मैत्रक वंश

  • गुप्त शक्ति के पतन के बाद में मैत्रक वंश का उदय हुआ।
  • प्रारंभ में गुप्तो के अधीन हुआ करते थे।
  • प्रमुख शासक –शिलादित्य(संस्थापक), धर्मादित्य, बालादित्य
  • चीनी यात्री हेनसांग के विवरण से पता चलता है कि मैंत्रक वंश के शासकों ने अपने शासन का विस्तार पश्चिम मालवा तक किया था।

रतलाम जिले से प्राप्त ताम्र लेख से पता चलता है कि मैत्रक शासकों ने मालवा में भूमि दान में प्रदान की थी।

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