मध्यकालीन अन्य वंश

बुंदेला वंश 

  • राजा लव के वंशज माने जाते हैं 
  • वीर बुंदेला ने मऊ मऊनी को राजधानी बनाकर बुंदेलखंड राज्य की स्थापना की।
  • विस्तार- दतिया ,नरवर, चंदेरी एवं ओरछा तक था 
  • प्रमुख शासक- वीर सिंह बुंदेला, पहाड़ सिंह बुंदेला, भगवान सिंह बुंदेला
  • 1531 में रुद्र प्रताप बुंदेला ने ओरछा को राजधानी बनाया 
  • बुंदेला शासक छत्रपाल ने छतरपुर नगर बसाया एवं औरंगजेब के समय उन्होंने बुंदेला विद्रोह का नेतृत्व किया 
  • बुंदेला वंश के अंतर्गत तीन प्रमुख रियासत आती थी– 
  • ओरछा रियासत- रुद्र प्रताप सिंह बुंदेला 
  • दतिया रियासत- भगवानदास बुंदेला 
  • अजय गढ़ रियासत- गुमान सिंह बुंदेला

ओरछा रियासत

  • वीर सिंह बुंदेला
  • जहांगीर के लिए ओरछा में जहांगीर महल का निर्माण करवाया एवं दतिया किले का निर्माण भी करवाया
  • जहांगीर के कहने पर अबुल फजल की हत्या कर दी 
  • शिवपुरी में स्थित करैरा किले का निर्माण
  • वीर बुंदेला ने मऊ मऊनी को राजधानी बनाकर बुंदेलखंड राज्य की स्थापना की।
  • रुद्र प्रताप सिंह बुंदेला– 
  • बुंदेला राजवंश का आदि पुरुष कहा जाता है, राजधानी ओरछा की स्थापना की
  • विक्रमजीत सिंह
  • 1783 में राजधानी ओरछा से टेहड़ी (टीकमगढ़) स्थानांतरित की

बघेलखंड वंश

  • स्थापना- 1236 में गुजरात से आए बीसलदेव एवं विमल देव दो भाइयों ने की 
  • बघेल अपनी उत्पत्ति चालुक्य अथवा सोलंकी वंश से मानते हैं।
  • प्रमुख शासक- बीसलदेव, सिंहदेव, रामचंद्र देव, मार्तंड सिंह ,नरसिंह देव
  • इस वंश के राजा अमर सिंह साहित्य प्रेमी थे इनके दरबार में नीलकंठ  एवं भूपति राय प्रमुख विद्वान थे 
  • वीर भानु के दरबारी कवि माधव ने वीरभानुदय-काव्यम की रचना की
  • राजा रामचंद्र के दरबारी कवि गोविंद भट्ट ने संस्कृत भाषा में रामचंद्रयश: प्रबंध की रचना की
  • बघेल शासक वीरभद्र ने संस्कृत भाषा में दो ग्रंथ कंदर्पचूड़ामणि तथा दशकुमारपूर्वकथासार का लेखन किया।
  • जागीरें
    • नागौद जागीर प्रारंभिक राजधानी में उचेहरा, राजा चैनसिंह द्वारा राजधानी उचेहरा से नागौद स्थानांतरित की गई
    • मैहर जागीर ठाकुर भीम सिंह
    • कोठी जागीर जगत राज सिंह बघेल
    • सोहावल जागीर फतेह सिंह
  • व्याघ्रदेव
    • बघेल वंश के मूल पुरुष, अंहिलवाड़ा गुजरात के सोलंकी वंश से संबंधित, बांधवगढ़ किले का निर्माण कराया, बघेल वंश के आदि पुरुष माने जाते हैं
  • भीमलदेव
    • 1236 में गहोरा, चित्रकूट में बघेल वंश की स्थापना की
  • वीर सिंह बघेल
    • गोंड शासक संग्राम शाह की सत्ता प्राप्ति में सहायता की
    • बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुक ए बाबरी में उल्लेख किया
    • वीर सिंह देव के दरबारी कवि रामचंद्र भट्ट ने संस्कृत भाषा में राधा चरित नामक काव्य लिखा
  • रामचंद्र बघेल
    • 1564 में राजधानी भट्टा गहोरा से बांधवगढ़ स्थानांतरित की, अकबर के समकालीन थे, तानसेन को अकबर के दरबार में भेजा
  • विक्रमजीत बघेल
    • अपनी राजधानी रीवा को बनाया
  • राजा अजीत सिंह
    • बांदा नवाब अली बहादुर द्वारा रीवा राज्य पर आक्रमण किया गया
    • मुगल बादशाह शाह आलम को आश्रय प्रदान किया
  • महाराज गुलाब सिंह
    • 1934 में रीवा में बैंक ऑफ बघेलखंड की स्थापना की
  • महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव
    • इस वंश के अंतिम शासक मार्तंड सिंह थे जिनके समय भारत का सफेद टाइगर मोहन मिला
    • बघेलखण्ड का भारत संघ में विलय हुआ

तोमर वंश 

  • इसकी शाखा 2 थी- रूहेलखंड एवं ग्वालियर 
  • राजा अनंतपाल ने तोमर वंश की स्थापना दिल्ली में की थी 
  • प्रमुख शासक- वीर सिंह देव, मानसिंह तोमर, गणपति देव तोमर 

वीर सिंह देव तोमर 

  • तोमर वंश की स्थापना 14 वी शताब्दी में की 
  • ग्वालियर में चतुर्भुज मंदिर, जीत स्तंभ का निर्माण करवाया 

मानसिंह तोमर

  • तोमर वंश का प्रसिद्ध शासक
  • गुजरी महल, बादलगढ़ महल, सहस्त्रबाहु मंदिर, मान मंदिर बनवाए। 
  • सिंचाई हेतु अनेक झीलों का निर्माण करवाया 
  • मान कौतूहल ग्रंथ की रचना की 
  • बहलोल लोदी ,सिकंदर लोदी एवं इब्राहिम लोदी से मानसिंह तोमर के युद्ध हुए।
  • 1517 ई में इब्राहिम लोदी ने ग्वालियर का किला जीता एवं मानसिंह वीरगति को प्राप्त हुए ।

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