राजपूतकालीन मध्य प्रदेश (7th to 12th AD)

  • मध्य प्रदेश में इस समय 4 राज्य वंश प्रसिद्ध हुए –
  • गुर्जर प्रतिहार वंश 
  • कलचुरी वंश 
  • चंदेल वंश 
  • परमार वंश

गुर्जर प्रतिहार वंश

  • जैन ग्रंथ कुबलयमाला एवं हरिवंश पुराण के अनुसार गुर्जर शासक वत्सराज का शासन मालवा पर था.
  • आठवीं शताब्दी में गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना हुई।
  • संस्थापक- नागभट्ट
  • शासन क्षेत्र- उज्जैनी
  • प्रमुख शासक- नागभट्ट प्रथम, द्वितीय, देवराज, वत्सराज.
  • गुर्जर वंश का महान शासक मिहिर भोज था उसने अपने राज्य को संगठित कर बुंदेलखंड क्षेत्र पर अधिकार किया।
  • मिहिर भोज के समय अरब यात्री सुलेमान भारत  आया।
  • मिहिर भोज की मुद्राओं में आदिवराह का चित्रण किया गया है ।
  • गुर्जर प्रतिहारओ से सर्वाधिक संघर्ष राष्ट्रकूटो के हुए।
  • मीहिर भोज का अभिलेख ग्वालियर अभिलेख  एवं सागर ताल अभिलेख 
  • इनके सामंत- 
    • कलचुरी 
    • परमार
    • चंदेल
  • गुर्जरों के पतन के बाद कलचुरी, परमार,चंदेल स्वतंत्र शासक हुए. 


महेंद्र पाल

  • गुर्जर प्रतिहार वंश का शासक
  • पालों के साथ संघर्ष किया
  • इसकी सभा में प्रसिद्ध विद्वान राजशेखर थे

महिपाल

  • इसके समय राष्ट्रकूट शासक इंद्र III ने आक्रमण किया
  • कन्नौज नगर पूर्णत: ध्वस्त किया गया
  • इसे आर्यव्रत का महाराजाधिराज कहा जाता है।

मिहिर भोज

  • मिहिर भोज गुर्जर प्रतिहार वंश के महानतम शासकों में से एक था
  • कालखंड- 836 से 885 AD
  • उल्लेख- ग्वालियर अभिलेख
  • राजनीतिक उपलब्धियां
    • चेदी शासकों की सहायता से साम्राज्य के पश्चिमी भाग को विजित किया
    • राजपूत वंश के कृष्ण द्वितीय को हराया
    • पूर्वी पंजाब के पेहोवा अभिलेख से ज्ञात होता है कि इसका साम्राज्य पंजाब तक विस्तृत था
  • सांस्कृतिक धार्मिक उपलब्धियां
    • मिहिरभोज वैष्णव धर्म का अनुयायी था
    • इसने आदि वराह की उपाधि धारण की थी
  • प्रशासनिक उपलब्धियां
    • इसने अपने साम्राज्य को 3 सामंतों में विभक्त किया हुआ था-
    • कलचुरी
    • परमार
    • चंदेल
  • आर्थिक उपलब्धियां
    • चांदी के सिक्के चलाए
    • अरब यात्री सुलेमान इनके समय भारत आया था

कलचुरी वंश (7TH AD)

इसकी तीन शाखा थी- 

  • माहिष्मती शाखा 
  • त्रिपुरी शाखा
  • रतनपुर शाखा

माहिष्मती शाखा

  • अत्यंत प्राचीन 
  • संस्थापक:- कृष्ण राज 
  • अन्य शासक कृष्णराज, शंकरगण, बुधराज
  • इस शाखा के शासक कृष्णराज ने तांबे , चांदी और शीशे के सिक्के डलवाए जोशी के बेसनगर और तेवर से प्राप्त हुए।
  • इस वंश के शासक शंकरगढ़ा ने 374 ईसवी में कलचुरी संवत प्रारंभ किया।

त्रिपुरी शाखा 

  • संस्थापक- वामराज 
  • वास्तविक संस्थापक- कोक्कल 
  • राजधानी- त्रिपुरी
  • इस वंश के कर्ण शासक ने अपने साम्राज्य का अत्यधिक भौगोलिक विस्तार किया। इसकी सैनिक उपलब्धियों के कारण इसे हिंदू नेपोलियन कहा जाता है.
  • शासक गंगोयदेव ने राजा भोज एवं राजेंद्र चोल से संबंध बनाए एवं चालुक्य नरेश जयसिंह II से संघर्ष किया।
  • कर्पूर मंजरी नाटक के रचयिता और काव्यमीमांसा के लेखक राजशेखर इस वंश के राज दरबार में रहता था।

रतनपुर शाखा

  • नवी शताब्दी के अंत में त्रिपुरी के क्षेत्र के दक्षिणी कौशल में रतनपुर शाखा की स्थापना हुई
  • राजधानी- तुम्माड
  • शासन क्षेत्र- रतनपुर, बिलासपुर, तुम्माड

वामराज

  • त्रिपुरी की कलचूरी शाखा का संस्थापक.
  • इसने सातवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में कालिंजर को जीतकर अपनी राजधानी पहले कालिंजर को बनाया तत्पश्चात त्रिपुरी को राजधानी घोषित किया.

कोक्कल प्रथम

  • साम्राज्य विस्तार
  • बिल्हारी अभिलेख के अनुसार कर्नाटक तथा लाट क्षेत्र जीता।
    • इसने चंदेल राजकुमारी नट्टा देवी से विवाह किया.
    • राजशेखर ने इन्हें उज्जैनी भुजंग की उपमा दी थी। इससे प्रतीत होता है कि इसने मालवा क्षेत्र विजित किया था।

चंदेल वंश 

  • क्षेत्र- बुदेलखंड
  • राजधानी- खजुराहो
  • जयसिंह अथवा जेजा के नाम पर यह प्रदेश जेजाकभुक्ति कहलाया। बुन्देलखंड का प्राचीन नाम जेजाकभुक्ति था। चन्देल राजाओं ने सर्वप्रथम देवनागरी लिपि का प्रयोग अपने लेखों में करवाया था।
  • 7th से 12th AD तक 
  • पूर्व मध्यकालीन राजपूत कालीन वंश 
  • संस्थापक- नन्नूक 
  • वास्तविक संस्थापक- चंद्र वर्मा या जय वर्मा
  • प्रतिहारों के सामंत थे
  • राजधानी- खजूरवाहक या खजुराहो
  • प्रमुख शासक- वाकपति, धंग, विद्याधर

नन्नुक

  • 831-900
  • चन्देल वंश की स्थापना 831 ई. के लगभग नन्नुक नामक व्यक्ति ने की थी। 
  • उ सकी उपाधि नृप तथा महीपति की मिलती है।
  •  वह स्वतंत्र शासक न होकर कोई सामन्त सरदार रहा होगा। 
  • इस समय की सार्वभौम सत्ता प्रतिहारों की थी।
  • नन्नुक बाद क्रमश: वाक्पति, जयशक्ति, विजयशक्ति व राहिल के नाम मिलते है। 

वाकपति

  • चंदेल वंश के शासक नन्नूक के पुत्र 
  • साम्राज्य विस्तार विंध्य पर्वत तक किया 
  • सैन्य क्षमता से साम्राज्य विस्तार

जेजाक

  • वाकपति के पुत्र 
  • जेजाकभूक्ति राजधानी बनाई

धंगदेव

  • सांस्कृतिक उपलब्धि
    • खजुराहो में पार्श्वनाथ एवं विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया।
  • राजनैतिक उपलब्धि
    • चंदेल वंश के सबसे प्रतापी शासक
    • बनारस पर अधिकार किया (खजुराहो अभिलेख के अनुसार)
    • आंध्र राज्य कुंतल एवं कौशल राज्य से युद्ध हुआ

विद्याधर

  • समय काल 1019 से 1027 ई तक
  • महमूद गजनवी से संधि की और अपने साम्राज्य को आक्रमण से बचाया 
  • खजुराहो का कंदरिया महादेव का मंदिर का निर्माण भी करवाया
  • इसका राजा भोज एवं गंगोयदेव(कलचुरी वंश) दोनों से युद्ध हुआ था

परमार्दीदेव

  • चंदेल वंश का अंतिम योग्य शासक 
  • समय काल 1166 से 1202 ई
  • 1182 में पृथ्वीराज चौहान ने जेजाक़ भुक्ति पर आक्रमण किया जिसमें इनके प्रसिद्ध सेनापति आल्हा ऊदल ने शौर्य का परिचय दिया एवम वीरगति को प्राप्त हो गए 
  • कुतुबुद्दीन ऐबक ने भी आक्रमण इन्हीं के शासन काल में किया।
  • पृथ्वीराज रासो में परमर्दिदेव की उपलब्धियों को बताया गया है

 परमार वंश   (973ई से 1305 ई तक)

  • संस्थापक- उपेंद्र 
  • वास्तविक संस्थापक- कृष्णराज 
  • राजधानी- उज्जैन, धार 
  • प्रमुख शासक-  मूंज ,राजा भोज, सिंधु राज  
  • प्रतिहारों के सामंत थे।

सियक द्वितीय 

  • राष्ट्रकूट नरेश (खोतिक) से स्वतंत्र होकर परमार वंश की नींव रखी।
मुंज के दरबारी लेखक
लेखकरचना
धनंसयदशरूपक
धनिकयशोरुपावलोक
पद्मगुप्त-नवसाहसांक चरित

वाकपति मुंज

  • परमार वंश के महान योद्धा विद्वान व सुयोग शासक 
  • समय काल 973 से 998 ई
  • इनके काल से मालवा का स्वर्ण काल शुरू हुआ 
  • धार में मुंज सागर झील का निर्माण किया गया 
  • महेश्वर, उज्जैन, ओमकारेश्वर में मंदिरों का निर्माण 
  • कलचुरी, हूणों एवं चालुक्यों पर विजय

सिंधु राज 

  • मुंज के पश्चात शासक बने
  • सिंधु राज की विजयों का वर्णन पदम गुप्त ने अपनी किताब नवसहषांक चरित्र में किया है।

राजा भोज 

  • परमार वंश के प्रसिद्ध शासक 
  • तलवार एवं ज्ञान के धनी कहे जाते हैं 
  • इनकी राजधानी धार थी 
  • राजनीतिक उपलब्धियां एवं साम्राज्य विस्तार 
    • चालूक्यों को हराया 
    • लाट के कीर्तिवर्मन को हराया 
    • कलचुरी के गंगे देव को हराया 
    • चौहान वीर्य राम को हराया 
    • गुजरात राज्य को जीता 
  • राज्य विस्तार
  • मालवा नदी, कोंकण प्रदेश ,खानदेश, गुजरात में कच्छ तक 
  • साहित्यिक उपलब्धियां
  • समरांगण सूत्रधार(वास्तुशास्त्रीय ग्रन्थ) 
  • सरस्वती कंठाभरम 
  • विद्या विनोद 
  • सिद्धांत संग्रह 
  • योगसूत्र वृत्ति 
  • शब्दानुशासन- व्याकरण से सम्बंधित
  • सूक्ति कल्पतरु
  • सांस्कृतिक या स्थापत्य कार्य
  • भोजताल, भोजपुर, भोजशाला में सरस्वती मंदिर/ शारदा सदन जहां पर वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की गई है।
  • कालांतर में मुस्लिम शासकों द्वारा सरस्वती मंदिर/ शारदा सदन को कमल मौला मस्जिद में परिवर्तिति कर दिया गया
  • अन्य कार्य 
    • महाकालेश्वर मंदिर एवं केदारनाथ मंदिर की मरम्मत करवाई
    • इनके दरबार में धनपाल, दामोदर मिश्र एवं भास्कर भट्ट रहते थे
    • इन्होंने त्रिभुवन मंदिर चित्तौड़गढ़ में बनवाया 
    • नागाई अभिलेख के अनुसार चालुक्य नरेश सोमेश्वर द्वितीय ने  धार पर आक्रमण किया एवं राजा भोज को पराजित किया।

कच्छवाहा वंश/कच्छपात वंश

  • कछवाहा राजवंश मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण राजवंश था।
  • शासन क्षेत्र – गोपाचल क्षेत्र (ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, दतिया का क्षेत्र शामिल था)
  • संस्थापक – ब्रजदामन
  • इस शाखा के इतिहास को जानने का प्रमुख स्त्रोत राजा महिपाल का सास बहू का मंदिर है
  • राजा महिपाल को सास बहू अभिलेख/ सहस्त्रबाहु अभिलेख में सूर्यजनित  कहा गया है।

राष्ट्रकूट राजवंश 

  • राष्ट्रकूट राजवंश मुख्यतया दक्षिण भारत से संबंधित था। 
  • इसकी दो शाखा थी अमरावती (बैतूल) एवं मान्यखेत 
  • 7th  से 10th AD तक राष्ट्रकूटो की एक शाखा ने अमरावती और बैतूल के क्षेत्र में अपना शासन किया।
  • इस शाखा का संस्थापक दंती दुर्ग था।
  • दंती दुर्ग ने उज्जैन विजय की एवं हिरणगर्भ यज्ञ किया 
  • आठवीं शताब्दी तक मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्से पर राष्ट्रकूटो  का शासन स्थापित हो गया था।
  • राष्ट्रकूट शासक गोविंद तृतीय का एक अभिलेख इंद्रगढ़ (मालवा) में मिला है ।
  • मालवा पर अपना अधिकार बनाने रखने के लिए राष्ट्रकूट शासक कृष्ण द्वितीय को राजा भोज से युद्ध करना पड़ा था।

गुहिल वंश

  • क्षेत्र- मंदसौर
  • संस्थापक- विग्रहपाल

तोमर वंश

  • क्षेत्र- ग्वालियर
  • संस्थापक- वीरसिंह

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